कोरोना संक्रमण के बीच एक और डराने वाली बीमारी सामने आयी है जिसे ब्लैक फंगस कहा जा रहा है. यह बीमारी मरीज की स्किन, लंग्स के साथ ही ब्रेन पर भी असर डाल रही है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीमारी से बचने के तरीकों के बारे में बताया है.
नई दिल्ली: देश इस वक्त कोरोना वायरस की दूसरी लहर की चपेट में है और पिछले सप्ताह की तुलना में इस सप्ताह भले ही संक्रमण के मामलों में कुछ कमी आयी हो लेकिन अब भी खतरा टला नहीं है. लिहाजा सावधानी और सतर्कता बेहद जरूरी है. कोरोना महामारी के बीच एक और बीमारी ने लोगों को बुरी तरह से डरा दिया है और उसका नाम है ब्लैक फंगस. इस बीमारी को मेडिकल टर्म में म्यूकोरमायकोसिस कहते हैं और यह बीमारी कोरोना से रिकवर होने के बाद मरीजों में ज्यादा देखने को मिल रही है.
ब्लैक फंगस के लक्षणों की पहचान है जरूरी
आखिर क्या है म्यूकोरमायकोसिस या ब्लैक फंगस?
किन लोगों को इस बीमारी का खतरा ज्यादा है?
ब्लैक फंगस के लक्षणों पर दें ध्यान
ब्लैक फंगस के लक्षणों पर अगर समय रहते ध्यान दिया जाए तो मरीज की जान बचायी जा सकती है:
-आंखों में या आंखों के आसपास लालिपन आना या दर्द महसूस होना
-बार-बार बुखार आना
-सिर में तेज दर्द होना
-खांसी और सांस लेने में तकलीफ महसूस होना
-खून की उल्टियां आना
-मानसिक स्थिति में बदलाव महसूस होना
ब्लैक फंगस से बचने के लिए क्या करें, क्या नहीं
क्या करें
बेहद जरूरी है कि मरीज हाइपरग्लाइसीमिया से बचे यानी अपने ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखे. कोविड-19 से ठीक होने के बाद और अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर आने के बाद भी लगातार ग्लूकोमीटर की मदद से अपने ब्लड ग्लूकोज लेवल को मॉनिटर करना जरूरी है. स्टेरॉयड का बहुत अधिक इस्तेमाल न करें और सही डोज और समय अंतराल का पता होना चाहिए. साथ ही एंटीबायोटिक्स और एंटी फंगल दवा का भी उचित इस्तेमाल करें. ऑक्सीजन थेरेपी के दौरान ह्यूमीडिफायर के लिए साफ और कीटाणुरहित पानी का इस्तेमाल करें.
क्या न करें
बीमारी के संकेत और लक्षणों को नजरअंदाज न करें. नाक बंद होने की समस्या को हर बार साइनस समझने की भूल न करें, खासकर वे लोग जो कोविड-19 के मरीज हैं. अगर जरा सा भी संदेह महसूस हो रहा हो तो पूरी तरह से जांच करवाएं. म्यूकोरमायकोसिस या ब्लैक फंगस के इलाज में देरी की वजह से ही मरीज की जान जाती है. शुरुआत में लक्षणों का पता करके समय पर इलाज होना बेहद जरूरी है.
आंख, नाक और जबड़े को भी प्रभावित करता है यह फंगसआपको बता दें कि ब्लैक फंगस कोविड संक्रमण से रिकवर हो चुके मरीजों की न सिर्फ आंखों की रोशनी छीन रहा है, बल्कि यह फंगस त्वचा, नाक और दांतों के साथ ही जबड़े को भी नुकसान पहुंचाता है. नाक के रास्ते यह फेफड़ों और मस्तिष्क में पहुंचकर मरीज की जान ले लेता है. यह इतनी गंभीर बीमारी है कि मरीज को सीधे आईसीयू में भर्ती करना पड़ता है. लिहाजा समय रहते लक्षणों का पता लगाना बेहद जरूरी है.
